संस्था का मिशन (Mission)
बाल विकास कल्याणकारी फाउंडेशन** का मिशन समाज के प्रत्येक बच्चे, युवा, महिला एवं जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक जागरूकता के माध्यम से समाज के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करती है।
हमारा विश्वास है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार अच्छे संस्कार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत पारिवारिक मूल्य हैं। इसी उद्देश्य से संस्था बच्चों और युवाओं में नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है।
संस्था विशेष रूप से “14 फरवरी – मातृ-पितृ पूजन दिवस” को परिवार, संस्कार और भारतीय संस्कृति के सम्मान का प्रतीक मानते हुए प्रतिवर्ष इस दिवस का आयोजन करती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में माता-पिता के प्रति सम्मान, कृतज्ञता, सेवा एवं आदर की भावना विकसित करना तथा परिवार संस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।
हमारा मिशन केवल सहायता प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक, शिक्षित एवं संस्कारित बनाना है ताकि वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त करते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सके।
संस्था का विजन (Vision)
बाल विकास कल्याणकारी फाउंडेशन** का विजन एक ऐसे शिक्षित, संस्कारित, स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर समाज का निर्माण करना है जहाँ प्रत्येक बच्चा अपने सपनों को साकार कर सके, प्रत्येक परिवार सम्मानपूर्वक जीवन जी सके तथा समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और नैतिक मूल्यों का विकास हो।
हम एक ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जहाँ माता-पिता का सम्मान, गुरुजनों का आदर, परिवार की एकता और भारतीय संस्कृति के मूल्य प्रत्येक घर की पहचान बनें। संस्था का मानना है कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं।
इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए संस्था “14 फरवरी – मातृ-पितृ पूजन दिवस” को एक सामाजिक एवं सांस्कृतिक जनआंदोलन के रूप में विकसित करने का संकल्प रखती है, जिससे युवा पीढ़ी अपने माता-पिता के प्रति प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त कर सके तथा भारतीय पारिवारिक मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाया जा सके।
संस्था का विजन बच्चों और युवाओं को शिक्षा, संस्कार, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़कर उन्हें राष्ट्र निर्माण का सक्रिय भागीदार बनाना है। हम एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जहाँ सेवा, संस्कार, शिक्षा और मानवीय मूल्य जीवन का आधार बनें तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
हमारा मूल मंत्र
“शिक्षा • संस्कार • सेवा • सशक्तिकरण”**
हमारा विशेष अभियान
🌸 14 फरवरी – मातृ-पितृ पूजन दिवस 🌸
“माता-पिता का सम्मान, भारतीय संस्कृति का अभिमान”
हमारा संकल्प
“बच्चों का विकासही,देश का विकास”
“मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः”
“सेवा ही संगठन का धर्म और समाज का कल्याण हमारा लक्ष्य है।”
अध्यक्ष का संदेश
प्रिय साथियों,
मुझे अत्यंत हर्ष एवं गर्व का अनुभव हो रहा है कि बाल विकास कल्याणकारी फाउंडेशन समाज के उत्थान एवं जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। हमारी संस्था का उद्देश्य केवल सामाजिक सेवा करना ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति, विशेषकर बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
हमारा विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों पर निर्भर करता है। यदि बच्चों को उचित शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य एवं विकास के अवसर प्राप्त हों, तो वे एक सशक्त, जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमारी संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन कर रही है।
भारतीय संस्कृति में माता-पिता को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है – “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः”। इसी भावना को जन-जन तक पहुँचाने के लिए हमारी संस्था प्रतिवर्ष 14 फरवरी – मातृ-पितृ पूजन दिवस का आयोजन करती है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों एवं युवाओं में माता-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम, सेवा एवं कृतज्ञता की भावना विकसित करना तथा भारतीय पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाना है।
आज के समय में समाज को केवल आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास की भी आवश्यकता है। हमारा प्रयास है कि आने वाली पीढ़ी भारतीय संस्कृति, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के महत्व को समझे तथा एक आदर्श समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
मैं संस्था से जुड़े सभी सदस्यों, स्वयंसेवकों, सहयोगियों, दानदाताओं एवं शुभचिंतकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग और विश्वास से हमारी संस्था निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम सभी मिलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और एक शिक्षित, संस्कारित, स्वस्थ एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के अपने संकल्प को अवश्य पूरा करेंगे।
आइए, हम सब मिलकर सेवा, संस्कार, शिक्षा और सामाजिक समरसता के माध्यम से एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें।
आपका सहयोग ही हमारी शक्ति है।
परिचय
भारतीय संस्कृति में माता-पिता को भगवान के समान माना गया है। हमारे वेदों, उपनिषदों एवं धर्मग्रंथों में माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा और समर्पण को जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य बताया गया है। “मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः” का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो हमें अपने माता-पिता के प्रति आदर, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
आज के आधुनिक युग में जहाँ भौतिकवाद और व्यस्त जीवनशैली के कारण पारिवारिक संबंधों में दूरी बढ़ती जा रही है, वहीं माता-पिता के प्रति सम्मान और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। इसी उद्देश्य से प्रतिवर्ष 14 फरवरी को “मातृ-पितृ पूजन दिवस” मनाया जाता है।
मातृ-पितृ पूजन दिवस का महत्व
मातृ-पितृ पूजन दिवस केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और नैतिक आदर्शों का उत्सव है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि माता-पिता हमारे जीवन के प्रथम गुरु, संरक्षक एवं मार्गदर्शक होते हैं। उनका त्याग, प्रेम, संघर्ष और समर्पण हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
इस दिन बच्चे और युवा अपने माता-पिता का पूजन कर उनके प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। यह आयोजन परिवारों में प्रेम, विश्वास और आपसी संबंधों को मजबूत बनाने का कार्य करता है।
बाल विकास कल्याणकारी फाउंडेशन की भूमिका
बाल विकास कल्याणकारी फाउंडेशन भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर कार्यरत है। संस्था का मानना है कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण मजबूत परिवारों से होता है और मजबूत परिवारों की नींव माता-पिता के सम्मान एवं संस्कारों पर आधारित होती है।
इसी उद्देश्य से संस्था प्रतिवर्ष 14 फरवरी – मातृ-पितृ पूजन दिवस के अवसर पर विभिन्न सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों, युवाओं एवं समाज के सभी वर्गों में माता-पिता के प्रति सम्मान, सेवा और कृतज्ञता की भावना को जागृत किया जाता है।
आयोजन के प्रमुख उद्देश्य
- माता-पिता के प्रति सम्मान एवं आदर की भावना विकसित करना।
- बच्चों एवं युवाओं को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ना।
- परिवार संस्था को मजबूत बनाना।
- समाज में नैतिक एवं मानवीय मूल्यों का विकास करना।
- माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक संबंधों को सुदृढ़ करना।
- सेवा, समर्पण एवं कृतज्ञता की भावना को बढ़ावा देना।
हमारा संदेश
माता-पिता हमारे जीवन का आधार हैं। उनका प्रेम, त्याग और आशीर्वाद हमें जीवन में आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है। आइए, हम सभी 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस के रूप में मनाकर अपने माता-पिता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करें तथा भारतीय संस्कृति के इस महान संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लें।